फौव्हारा चौक जूल प्लॉट में जमीन “गायब” होने का मामला: 1546 वर्गफुट की अनुमति, 3500 वर्गफुट में खड़ा हो गया भवन

फौव्हारा चौक जूल प्लॉट में जमीन “गायब” होने का मामला: 1546 वर्गफुट की अनुमति, 3500 वर्गफुट में खड़ा हो गया भवन
कोरिया। शहर के फौव्हारा चौक स्थित जूल प्लॉट खसरा नंबर 155/2 में भूमि उपयोग परिवर्तन (डायवर्सन) और भवन निर्माण को लेकर गंभीर अनियमितताओं का मामला एक बार फिर चर्चा में है। वर्ष 2011 में जहां मात्र 1546 वर्गफुट भूमि के लिए व्यवसायिक परिसर निर्माण की अनुमति दी गई थी, वहीं अब जांच में सामने आया है कि लगभग 3500 वर्गफुट क्षेत्र में बहुमंजिला भवन खड़ा कर दिया गया है। सवाल यह है कि अतिरिक्त जमीन आई कहां से, और वह खाली जगह कहां गई जो पुराने नजरी नक्शे में साफ दिखाई देती थी। जानकारी के अनुसार भूमि स्वामी द्वारा भूमि उपयोग परिवर्तन के समय कुल 2400 वर्गफुट भूमि बताई गई थी, लेकिन डायवर्सन केवल 1546 वर्गफुट का ही कराया गया। इससे पहले 4 सितंबर 2008 को तैयार नजरी नक्शे (दिनांक 04/09/08) में खसरा नंबर 155/2 और समीप स्थित सामुदायिक भवन के बीच स्पष्ट रूप से खाली जगह दर्शाई गई थी। यही नक्शा आज पूरे विवाद की जड़ बन गया है, क्योंकि वर्तमान वर्ष 2025-26 में वही खाली जगह जमीन पर दिखाई ही नहीं देती। मानो वह जगह या तो “आसमान खा गया” हो या फिर कागजों और फाइलों के खेल में जमीन ही निगल ली गई हो।
आवेदक संजय गुप्ता द्वारा नगर पालिका कार्यालय में 1546 वर्गफुट भूमि पर व्यवसायिक परिसर हेतु डायवर्सन की अनुमति मांगी गई थी। इस आवेदन पर अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व), नजूल कार्यालय बैकुण्ठपुर द्वारा 6 तारीख 2011 को सशर्त अनुमति प्रदान की गई। अनुमति के बाद भवन निर्माण प्रारंभ हुआ और धीरे-धीरे यह निर्माण तीन मंजिला स्तर तक पहुंचने लगा।
इसी दौरान 6 अगस्त 2021 को जिला जेल विभाग ने जिला कलेक्टर कार्यालय में एक गंभीर शिकायत दर्ज कराई। शिकायत में कहा गया कि जिला जेल के मुख्य द्वार से मात्र 50 मीटर की दूरी पर, सड़क के उस पार, खसरा नंबर 155/2 में तीन मंजिला भवन का निर्माण हो रहा है, जिससे जेल की सुरक्षा को खतरा उत्पन्न हो सकता है। जेल प्रशासन ने भवन को तत्काल बंद कराने की मांग की थी। जेल विभाग की शिकायत के बाद नजूल कार्यालय सक्रिय हुआ और 19 अगस्त 2021 को राजस्व निरीक्षक द्वारा पंचनामा तैयार किया गया। पंचनामा में स्पष्ट उल्लेख किया गया कि जिला जेल के सामने तीन मंजिला भवन का निर्माण किया जा रहा है और आदेशानुसार उस दिन से कार्य बंद है। लेकिन जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल अलग बताई जाती है। सूत्रों के अनुसार, कागजों में निर्माण बंद दिखाया गया, जबकि धरातल पर काम लगातार चलता रहा और भवन आकार लेता गया।

इस मामले में अनुविभागीय अधिकारी नजूल कार्यालय में प्रकरण क्रमांक 202108012400006-अ-20(4) दर्ज किया गया। यह प्रकरण 31 अगस्त 2021 से 20 मई 2022 तक चला, लेकिन इस दौरान अधिकांश तिथियां केवल “शासकीय कार्य में अधिकारी व्यस्त” होने के नाम पर बढ़ाई जाती रहीं। नतीजा यह हुआ कि न तो समय पर निर्णय हुआ और न ही कोई ठोस कार्रवाई।

सूत्र बताते हैं कि वर्ष 2025 में एक बार फिर शिकायत हुई, जांच भी कराई गई और 29 सितंबर 2025 को कागजों में पुनः कार्य बंद बताया गया। लेकिन स्थानीय लोगों का कहना है कि वास्तविकता में निर्माण कार्य चलता रहा। अंततः जब नजूल अधिकारी और कर्मचारियों ने दोबारा जांच की, तो चौंकाने वाला तथ्य सामने आया—खसरा नंबर 155/2 में 1546 वर्गफुट नहीं, बल्कि लगभग 3500 वर्गफुट क्षेत्र में भवन निर्माण किया जा चुका है।

इसके बाद अनावेदक भूमि स्वामी ने कलेक्टर कोरिया से पुनः जांच की मांग की। कलेक्टर के निर्देश पर नजूल अधिकारी के आदेशानुसार फिर से जांच हुई। इस जांच में भी वही तथ्य सामने आए जो पहले बताए जा चुके थे, लेकिन इसके बावजूद अब तक कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हो सकी। इस पूरे मामले ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक ओर रामपुर क्षेत्र में गरीब की झोपड़ी तोड़ने में प्रशासन ने देर नहीं लगाई और तत्काल अतिक्रमण हटाया गया, क्योंकि वहां न तो राजनीतिक पहुंच थी और न ही बड़े नामों का संरक्षण। वहीं दूसरी ओर फौव्हारा चौक जैसे व्यस्त इलाके में नियमों को ताक पर रखकर बने बहुमंजिला भवन पर वर्षों से कार्रवाई टलती आ रही है।
अब सवाल यह है कि क्या प्रशासन इस “गायब” हुई जमीन और नियम विरुद्ध निर्माण पर सख्त कदम उठाएगा, या फिर यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा। शहर की जनता की निगाहें अब जिला प्रशासन और जिम्मेदार अधिकारियों की अगली कार्रवाई पर टिकी हुई है।





